नज़्म »

ललित कुमार द्वारा लिखित, 17 अप्रैल 2012 यह एक धूल के कण की दरख्वास्त है। अपने प्रिय के कदम चूमने कि जिस इच्छा को उसने उम्र भर अपने दिल में … Read more

हिन्दी कविताएँ »

ललित कुमार द्वारा लिखित, 06 अप्रैल 2012 भीतर क्या है कोई ना जाने आहत करना बस ये जग जाने इनको रखता मैं सदा ही बंद बाहर का जग मुझे नहीं … Read more

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ललित कुमार द्वारा लिखित, 06 अप्रैल 2012 मृगतष्णा (सराब) अपने आप में एक अनोखी चीज़ होती है। मजबूर… अपने अस्तित्व से अनजान… उसमें आकर्षण है –लेकिन उससे किसी की प्यास … Read more