नहीं चाहिए ऐसा प्यार

ललित कुमार द्वारा लिखित; 31 जनवरी 2012
एक नई कविता…
आदर-सा जो लगता हो
नहीं चाहिए ऐसा प्यार
चाह मुझे तो है उसकी
जो माने मुझ पर निज अधिकार

आदर सिर-माथे तो रखता है
पर सीने नहीं लगाता है
जो प्रेम से सना नहीं हो
ऐसा भाव कहाँ भाता है

बिन गणना बिन कारण के
मेरे हो तुम मैं हुआ तुम्हारा
यही बंधन है सबसे प्यारा
बाकी जो है सब व्यापार

चाह मुझे तो है उसकी
जो माने मुझ पर निज अधिकार

इस चमक-दमक में मत पड़ना
कि जग मुझको सीस नवाता है
सब भूल कर प्यार मुझे देना
कह, क्या तू ऐसा दाता है?
आओ, कर दो मेरे सपन साकार

चाह मुझे तो है उसकी
जो माने मुझ पर निज अधिकार