आज मेरा मन उदास है

ललित कुमार द्वारा लिखित;
आज मेरा मन उदास है
किससे कहूँ?
नहीं कोई आस-पास है
किससे कहूँ?

इस सूनेपन को
एकाकी मन को
इन सन्नाटों को
अनकही बातों को
इन अंधेरों को
दुखों के घेरों को
इस गहराती रात को
अपने मन की बात को
किससे कहूँ?

आज मेरा मन उदास है
किससे कहूँ?
नहीं कोई आस-पास है
किससे कहूँ?

  • Kavita

    I’m there for you. I swear!

  • हरि घिमिरे

    आदमी और प्रकृतिका तादात्म्य सम्बन्ध है।जब प्रकृति उजाड हो जाता है तो आदमी भी उदास हो जाता है।जब प्रकृति में वसन्त आजाती है तो मानव मन प्रफुल्ल हो जाति है।सायद आप भी प्रकृतिको देखकर' उदास बन गए हैं।किसि से कुछ नकहना; अपने आपको तसल्नी देना!

  • Arun Roy

    बेहतरीन कविता

  • Pant Minakshi91

    हमसे कहो न दोस्त 🙂
    अपनी बात कहने में सफल एक खुबसूरत रचना |

  • Mukesh Negi

    अकेलेपन की स्थिति को बखूबी से प्रस्तुत किया है,अच्छी अभिव्यक्ति.

  • Dinesh dinkar

    bahut hi accha hai lalil g.

  • Pcjain101

    it makes one experience the pain of loneliness

  • Ram

    इसे पढने के बाद अनायास ही मुझे फैज़ साब की ये पंग्तियाँ याद आ गयी “उम्मीद -ए-यार नज़र का मिजाज़ दर्द का रंग तुम आज  कुछ  भी  न पूछो कि दिल उदास बहुत है “

  • Garima Sharma

    jise hum mahsoos karte hain, jo shabd man me rahate hain, par itni si bat hum kisi se kah nahi pate. apne vahi baat kah di h. Really nice & simple.

  • Shilpi_atoz

    kabhi kabhi inssan kitana udass ho jata hai ki usse dusaro ki jarrurt hoti hai per koi saath nahi hota hai tab woh apne aap ko bahut akela mahsos karta hai

  • Jasj595

    jarroor man ko sadness se door karnee ke liye  khud bhul jao……………………….

  • jaspal singh

    this is good    

    man hai manav tan hai kapda,waqt apni jindgi
    tan hi ucha hota jab ,kiriya karti jindgi
    man or waqt ki chaloo se, girti  savrti jindgi 
    yahan laksya uska hai khuda ,prayatan uski bandgi………………………to be countineud  plese comment fir this    

  • Shanu_kavita

    kabhi koi Kishi Ke Sath Rahta Hai To Saja Milti Agar Tum Kishi Ko Pyar Karoge To Rona Tumhe Hi Padega Isliye Hamesh kabhi Kishi Ko Itna Age Mat Ane Do Ki Tumhe Rona pade ( Jab pesha Pass Hamare The tab Dost Hamare lakho The AAj pesha Hua Kahtm To puchne Vala Koi Nahi jab Bag The Hamara Hara Bhara To idhlati Hui calti the hava 

  • Anupama

    उदासी ने लिखवाई कितनी सहज सरल सी कविता… “किससे कहूं?” जैसे भोले से प्रश्न का सहज सरल सा उत्तर भी शायद बस इतना ही है… “किसी से क्या कहना, जो समझने वाला होगा वो बिना कहे ही भांप लेगा!”