सम्मानव: विश्व प्रसिद्ध विकलांगजन की प्रेरक गाथाएँ
सम्यक ललित द्वारा लिखित इस पुस्तक में विश्व प्रसिद्ध 25 विकलांगजन की रोचक कहानियाँ दी गई हैं।
पुस्तक को श्वेतवर्णा प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। हिन्दी भाषा में लिखी 284 पृष्ठ की इस पुस्तक को अमेज़न और श्वेतवर्णा की वेबसाइट से प्राप्त किया जा सकता है।

सम्मानव का अर्थ क्या है?
'सम्मानव' सम्यक ललित द्वारा निर्मित एक शब्द है जिसे वे विकलांगजन सहित हर उस व्यक्ति के लिये प्रयोग करना चाहते हैं जो समाज में अपने अधिकारों से वंचित हैं। यह शब्द 'समता', 'सम्मान' और 'मानव' -- इन तीन शब्दों को मिला कर बनाया गया है। सम्मानव का अर्थ है आपके जैसा ही, आप ही के समान एक मानव -- जिसे वह सम्मान दिया जाना चाहिये जो हर मनुष्य को इसलिये दिया जाता है क्योंकि वह एक मनुष्य है।
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पाठकों की टिप्पणियाँ
सबसे पहले तो एक बेहतरीन इंसान और एक लेखक के रूप में सम्यक ललित जी को सादर प्रणाम 🙏 सम्मानव सिर्फ एक पुस्तक नहीं है। बल्कि एक उर्जा हैं इस पुस्तक को आप कहीं से और किसी भी पेज को पढ़कर अपने आप को मोटिवेट कर सकते हैं।इस पुस्तक को पढ़कर अपने में कुछ ढूंढने की प्रेरणा मिलती हैं।इस पुस्तक में ढेर सारी जानकारी भी प्राप्त होगी जिनसे आप अभी तक अनभिज्ञ थे। मौका मिले तो जरूर पढ़ें।
Rating: 5 out of 5★★★★★
दुनियाभर में बदलाव लाने वाले दिव्यांगजनों (सम्मानवों) के जीवन गाथा का बेहतरीन संकलन। यह किताब प्रेरणादायक होने के साथ साथ दिव्यांग बच्चों के माता पिता के लिए भी बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। भारत में दिव्यांगता के प्रति लोगों के नजरिए में बदलाव लाने के लिए सरल हिन्दी भाषा में इस तरह के पुस्तकों की बहुत आवश्यकता है।
Rating: 5 out of 5★★★★★
शानदार! फिक्शन के अंदाज में नॉन फिक्शन
Rating: 5 out of 5★★★★★