दोस्त-सखी दिवस

आज 27 फ़रवरी यानी “दोस्त-सखी दिवस” है। आप सोचेंगे कि पहले से मौजूद इतने सारे “दिवसों” के बीच ये कैसा नया दिवस आ गया जिसका नाम ही कभी नहीं सुना!

आपने इसका नाम कभी नहीं सुना क्योंकि “दोस्त-सखी दिवस” को विश्व में केवल दो व्यक्ति ही मनाते हैं और यह बना भी केवल उन्हीं दो व्यक्तियों के लिए है: “दोस्त” यानी मैं… और “सखी” यानी माधवी…

माधवी से मैं अब से दस वर्ष पहले रीडिफ़ के एक चैटरूम में मिला था। इंटरनेट मेरे लिए उस समय एक नई चीज़ थी। जीवन में अनुभव कम था -सो मन में नए दोस्त बनाने की इच्छा भी प्रबल थी। नतीजतन, चैटरूम्स में आना-जाना लगा रहता था। मैंने इन चैटरूम्स का प्रयोग शायद एक वर्ष के लिए किया और सैंकड़ो नए लोगों से बातचीत की –लेकिन उन सब में से मुझे केवल दो व्यक्ति ऐसे मिले जो मेरी तरह ताउम्र मित्रता निबाहने में विश्वास रखते थे। माधवी इनमें से एक थी।

चैटरूम्स में उस समय मैं “your_dost_forever” नाम से बात किया करता था। सो माधवी ने मुझे “दोस्त” ही कहना आरम्भ कर दिया। फिर मैंने भी अपनी ओर से माधवी को एक खूबसूरत नाम दिया: सखी।

उस समय मैं और मेरी सखी, हम दोनों ही अपने-अपने जीवन में भावनात्मक कठिनाईयों से जूझ रहे थे। ऐसे में हमने सच्चे मित्रों की तरह एक दूसरे की सहायता की और हमारी मित्रता अधिक मज़बूत हो गई। स्वभाविक था कि एक समय ऐसा भी आया जबकि हमारे मन में जीवनसाथी बनने का विचार उपजा! लेकिन यह विचार कुछ पल भी हमारे मन में नहीं ठहर पाया। हम दोनों को ही हमारी विशुद्ध मित्रता बहुत प्यारी थी; और हम मित्रता को मित्रता की सर्वोच्च ऊँचाई तक ले जाकर अनुभव करना चाहते थे। तब मैंने माधवी के लिए “एक दोस्त” शीर्षक से कविता लिखी थी। उस कविता की सबसे महत्त्वपूर्ण पंक्तियाँ ऐसे हैं।

एक दोस्त जो दोस्त से ज़्यादा कुछ भी ना हो
एक दोस्त जिससे ज़्यादा और कुछ भी ना हो

यदि आप चाहें तो इस पूरी कविता को यहाँ पढ़ सकते हैं। काव्य की दृष्टि से मैं इसे काफ़ी कच्ची रचना मानता हूँ; लेकिन इसमे भावनाएँ शुद्ध हैं। जब हमारी मित्रता को एक वर्ष पूरा होने में एक दिन रह गया (यानी 26 फ़रवरी के दिन) –हम दोनों ने ही एक-दूसरे को पत्र लिखा कि हमें यह अवसर मनाना चाहिए। हम दोनों इस बात से अनजान थे कि दूसरा भी इसी तरह का विचार मन में रखता है! मैंने 27 फ़रवरी के इस दिन को नाम दिया “दोस्त-सखी दिवस”… और तब से हम इसे हर वर्ष मनाते हैं और एक दूसरे के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

माधवी की मित्रता मेरे जीवन की उपलब्धियों में से एक है। उनके लिए मेरे मन में जो आदर, प्रेम व शुभकामनाएँ हैं; उसका कोई ओर-छोर नहीं। माधवी के विवाह को कई वर्ष बीत चुके हैं। जब से उनका विवाह हुआ है –वे अपने वैवाहिक जीवन में व्यस्त हो गई और हमारे बीच संवाद लगभग बंद-सा हो गया। अब साल-दो-साल में एक बार बातचीत होती है; लेकिन हम चाहे कहीं भी हों –चाहे जैसी भी परिस्थिति हो –हम अपने मित्रता दिवस पर एक-दूसरे को याद करना नहीं भूलते।

हमें गर्व है कि हमने अपनी मित्रता को मन से पोषित किया और मित्रता के निश्छल, स्वच्छ और विशुद्ध संबंध को बरकरार रखा। “एक दोस्त” कविता की अंतिम पंक्तियाँ कुछ यूं हैं:

ज़िन्दगी में दोस्तों की कोई कमी ना थी
दोस्त तो थे बहुत पर एक सखी ना थी

एक दोस्त की दिल में ऐसी कोई छवि ना थी
एक दोस्त मेरी जब तक माधवी ना थी

माधवी, आप जहाँ भी हैं –आपको दोस्त-सखी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। ईश्वर आपको संसार की सारे खुशियाँ दे –मैं हमेशा ऐसी ही प्रार्थना करता हूँ

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