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© लेखक: Lalit Kumar
January 12, 2011

एक अच्छे ब्लॉग की ज़रूरतें – भाग 3

आज हम बात करते हैं कि ब्लॉग्स पर क्या लिखा जाए और कैसे लिखा जाए।

मैं इंटरनेट पर हिन्दी भाषा से कई वर्षों से जुड़ा हुआ हूँ। इस दौरान सैंकड़ों ब्लॉग्स देखे हैं और सैंकडों ब्लॉगर्स से विभिन्न स्तरों पर बातचीत की है। अधिकांश लोगो का कहना है कि वे “स्वांत: सुखाय” अर्थात केवल अपनी ख़ुशी के लिए लिखते हैं। हालांकि सामान्य रूप से कहूँ तो मेरा अनुभव कुछ और ही कहता है। आगे पढ़ने से पहले आप समझ लें की मेरी कुछ बातें आपको बुरी भी लग सकती है –लेकिन जब तक हिन्दी ब्लॉग जगत अपनी शल्य-चिकित्सा खुद नहीं करेगा –जब तक यह दुनिया स्वयं के साथ ईमानदार होना नहीं सीखेगी –तब तक एक अच्छे हिन्दी ब्लॉग जगत का सपना केवल सभाओं में अक्सर दोहराया जाने वाला जुमला मात्र बनकर रह जाएगा।

सबसे पहले हमें यह स्वीकारना होगा कि शायद एक प्रतिशत लोग भी “स्वांत: सुखाय” नहीं लिखते। हालांकि यह भी सच है कि चाहे एक प्रतिशत से कम ही सही पर कुछ लोग वाकई में “स्वांत: सुखाय” लिखते हैं। मैं ऐसे कुछ लोगो के ब्लॉग्स तो देख ही चुका हूँ।

अधिकांशत: लोग “स्वांत: सुखाय” नहीं लिखते उनके लिखने के पीछे हमेशा कोई ना कोई उद्देश्य या इच्छा छिपी रहती है। ऐसा होना कोई बुरी बात नहीं है –लेकिन स्वयं के साथ ईमानदार होना ज़रूरी है। अगर आप “स्वांत: सुखाय” नहीं लिखते तो इसे स्वीकारने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।

सबसे बड़ी इच्छा तो टिप्पणियाँ पाने की होती है। लोग आपके ब्लॉग पर टिप्पणियाँ करें और आपके लिखे को (चाहे पढ़े बिना ही सही पर) सराहें। यकीन मानिए, यह हिन्दी ब्लॉगिंग की सबसे बड़ी कमज़ोरियों में से एक है। टिप्पणी पाने की इच्छा कोई असामान्य बात नहीं लेकिन कोई टिप्पणी आई या नहीं यह देखने के लिए दिन में पचास बार ब्लॉग खोलना ज़रूर असामान्य है।

टिप्पणियों के प्रति इतना अधिक झुकाव ठीक नहीं है। इस परिपाटी के चलते लेखन और पाठन दोनो पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मैं ये नहीं कहूँगा कि अगर कोई मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी करता है तो मुझे अच्छा नहीं लगता। मुझे भी यकीनन अच्छा लगता है –लेकिन मैं टिप्पणियों की ओर अधिक झुकने की बजाए इस बात को ज़्यादा अहमियत देता हूँ कि कितने लोग मेरा लिखा पढ़ते हैं और कितना पढ़ते हैं। “बहुत सुंदर”, “वाह”, “क्या खूब लिखा है” जैसी टिप्पणियाँ मुझे कभी भी आकर्षित नहीं करती –चाहे वे सैंकड़ों की संख्या में ही क्यों ना आएँ। इसके बनिस्बत चाहे दो-चार ही सही पर मैं ऐसी टिप्पणियाँ चाहूँगा जिनमें पाठकों ने मेरे लिखे को ठीक से पढ़कर और उस पर सोच-विचार करके कुछ रचनात्मक लिखा हो। आज ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं जिनके ज़रिये आप ये जान सकते हैं कि कितने लोग आपके ब्लॉग पर आए। इसके बारे में तो आप सभी जानते हैं। लेकिन इन आंकड़ो के अलावा यह जानकारी भी उपलब्ध होती है कि पाठकों ने औसतन कितना समय आपके ब्लॉग पर बिताया। मेरे लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण आंकड़ा है और मैं टिप्पणियों की संख्या से अधिक इसी आंकड़े को महत्व देता हूँ। इससे मुझे पता लगता है कि मेरे लिखे को कोई वाकई में पढ़ भी रहा है या नहीं। हिन्दी ब्लॉग जगत में एक चलन है कि लेख को पढ़कर या बिना पढ़े “पाठक” एक लाइन की टिप्पणी लिखकर चलते बनते हैं। बहुत से लोगो का मानना है कि इसके पीछे टिप्पणियों के लेन-देन की मानसिकता काम करती है। आज अगर मैं आपके ब्लॉग पर टिप्पणी कर रहा हूँ तो कल आपसे भी यह अपेक्षा होगी कि आप मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी करें। मैं इस चलन को ग़लत या सही नहीं ठहरा रहा –मैं केवल इतना कह रहा हूँ कि इस तरह की टिप्पणियों के बूते पर आप यह नहीं कह सकते कि आपका लिखा कैसा है और कितने लोगों ने इसे वाकई पढ़ा है। और फिर देखा जाए तो पाठक के केवल पढ़ लेने मात्र से आपका लेखन सफल नहीं हो जाता। आपके लिखे में कुछ ऐसा होना चाहिए जो पढ़ लिए जाने के बाद पाठक को सोचने पर मजबूर करे… या उसके काम आए।

हिन्दी ब्लॉग जगत प्रयोगो के दौर के अंत में चल रहा है। अधिकांश प्रयोग पहले ही हो चुके हैं –जैसे कि सामूहिक ब्लॉगिंग, ब्लॉग चर्चाएँ, ब्लॉग अन्वेषण इत्यादि। अब समय है कि हम सार्थक और गंभीर लेखन की ओर अग्रसर हों। कुछ भी लिखने से पहले आप उसके बारे में उसी तरह से मेहनत करें जिस तरह आप तब करते यदि आपका लिखा एक पुस्तक की शक्ल में छपने जाता। ब्लॉगिंग को कमतर ना आंके। आप अच्छा लिखेंगे तभी आपको अच्छे और नियमित पाठक मिलेंगे। शोध करके, सोच-विचार कर जितना सटीक और अच्छा हो सके उतना अच्छा लिखें।

हिन्दी ब्लॉग्स का सबसे बड़ा हिस्सा कविताओं के ब्लॉग्स का है। कवि तो हर किसी के अंदर होता है और सतत लेखन-पाठन के ज़रिए अपने अंदर के कवि को निखारा भी जा सकता है। लेकिन मुझे यह जानकर आश्चर्य होता है कि अधिकांश नए-पुराने कवि इस बात के बारे में कभी नहीं सोचते कि वे कविताओं के अलावा भी हिन्दी में बहुत कुछ लिख सकते हैं। क्या एक सरकारी महकमें में काम करने वाले किसी कवि की काव्य के अलावा किसी और विषय में रुचि नहीं होती? या किसी सॉफ़्टवेयर इंजिनीयर कवि की किसी और विषय में रुचि नहीं होती? फिर अक्सर क्यों लोग केवल काव्य को ही अभिव्यक्ति का माध्यम बनाते हैं? ठीक है, कविताएँ भी लिखिए –लेकिन यह ज़रूर सोचिए कि आप लेख भी तो लिख सकते हैं ना। किसी भी विषय पर एक अच्छा लेख अगर आपने दो महीने में भी लिख दिया तो कितना अच्छा होगा!

हिन्दी ब्लॉगिंग में विषयों का अभाव है। कुछ लोगो ने अच्छी पहल की हुई हैं -जैसे कि आयुर्वेद, जड़ी-बूटियों का महत्व, शेयर बाज़ार, आर्थिक मसले, ब्लॉग तकनीक इत्यादि विषयो पर कुछ अच्छे ब्लॉग्स हैं –लेकिन ये नाकाफ़ी हैं। इन विषयों पर लिखने वाले कम हैं और हज़ारों अन्य विषय ऐसे हैं जिन पर कुछ भी नहीं लिखा जाता। इस अभाव को आप अवसर की तरह भी देख सकते हैं!

ब्लॉग्स लेखन के लिए हैं। प्रतियोगिता, व्यक्तिगत आक्षेप, लड़ाई-झगड़े, गाली-गलौच, गुटबाज़ी, गुटों या मतों की राजनीति –आप इन सभी बातों से बचिए… इस तरह के लेखन का तो कहीं भी स्थान नहीं है। किसी से भी आपका वैमनस्य है –तो उसे ब्लॉग पोस्ट्स के ज़रिये मत प्रकाश में लाइये –सामने वाले व्यक्ति से मिलिये या फ़ोन कीजिए और आपस में बात करके मुआमला सुलझा लीजिए। ब्लॉग पर यह सब लिखकर आप अपनी छवि और लेखक के रूप में अपने नाम को केवल हानि ही पँहुचाते हैं। जैसा कि अंग्रेज़ी में कहा जाता है “Don’t wash your dirty linen in public”…

एक और बेहद महत्वपूर्ण बात… आप इंटरनेट पर जो कुछ भी लिख देते हैं वह हमेशा के लिए अमिट हो जाता है। यह मत सोचिए कि आपने अपना लिखा डिलीट कर दिया तो अब उसे कोई नहीं पढ़ पाएगा। कहीं ना कहीं आपके लिखे को फिर भी ढूंढा जा सकता है। इसलिए कोई भी शब्द ब्लॉग पर लिखने से पहले यह सोच लीजिए कि क्या वह शब्द आपके परिवार द्वारा पढ़े जाने योग्य है?… हो सकता है दस साल बाद आपके बच्चों के सामने आपका लिखा आ जाए। इस बात को सोचकर ब्लॉगिंग कीजिए।

ब्लॉग केवल लेखन के लिए है… अच्छी, जानकारीपूर्ण, रोचक और शोधपरक सामग्री के लिए…

अपनी पहचान गंभीर, सटीक और स्वस्थ लेखन से बनाइये…

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Wednesday, January 12, 2011 को पोस्ट किया |
  • http://malwithiya.blogspot.com/ Rajesh joshi

    धन्यवाद, आपने दर्पण दिखा दिया!

  • http://www.merikavitaye.blogspot.com Sant Sharma

    Sundar evm sakaratmak sujhav deta lekh. Padhna aur gunna achchha laga.

  • Vinay

    ललित,
    काफी महत्वपूर्ण और उपुक्त जानकारी आप ने लिखी है, इसे पढ़ कर ब्लॉग लिखने के लिए इच्छुक लोगों को काफी फायदा होगा. मै कई लोगो को जनता हूँ जो ब्लॉग लेखन करना तो चाहते है लेकिन जानकारी के आभाव के कारन कैसे शुरुवात करे यह नहीं जानते (वे लोग इन्टरनेट की सोशल सितेस से ज्यादा परिचित नहीं) उन लोगों के मै इन लेखों से अवागर करावुंगा शायद उनको इस जानकारी से ब्लॉग लेखन शुरुवात करने की प्रेरणा मिले.
    विनय

  • http://blog.sureshchiplunkar.com Suresh Chiplunkar

    excellent and खरी-खरी…

  • surendra parihar

    BHASHA SAILI KAFI ACHHI TATHA UPYOGI HE,KAFEE LOGO KO ISSE BAHUT GYAN PRAPT HOGA. AAP DHANY HE KI APANA GYAN LOGO ME BAAT RAHE HE

  • http://uddhvji indu puri

    आपके ब्लॉग पर आई अच्छा लगा.जिसकी मुझे तलाश थी वो विषय मुझे यहाँ पढ़ने को मिला.ब्लॉग लिखना शुरू किया और जो मन ने कहा मैंने लिखा.यहाँ ‘वाह वाह’ करने वाले मिले किन्तु मार्ग दर्शन देने वाला कोई नही था.और सच कहूँ मैं चाहती थी कि ऐसा कुछ करूं जो मेरे मन को सुकून तो दे ही मेरे विचार लोगों तक पहुंचे.मुझे ब्लोगिंग एक ज़रिये के रूप में बेस्ट ओप्शन मिला.इस जीवन में बहुत कुछ ऐसा देखा,अनुभव किया और ….किया कि आज भी इश्वर बुला लेता है तो कोई बोझ नही आत्मा पर.पूजा पाठ नही करती किन्तु ईश्वर के बताए रस्ते पर चलने की कोशिश की.उन्ही सबको शब्दों में ढालने की कोशिश करती रही बिना ये सोचे कि कितने पाठक आयेंगे?किस स्तर के आयेंगे?
    आपके आर्टिकल को पढ़ने पर लगा बिना पूर्व अनुभव के मैं वो सब कर रही हूँ जो एक ब्लोगर को करना चाहिए.मैंने दिल की सुन कर दिल से लिखा,दिल की आवाज ही मेरा सच्चा और अच्छा समीक्षक रहा है.
    क्या करूं? ऐसिच हूँ मैं तो.आप मेरी लेखनी में सुधार करेंगे.बेझिझक मेरी कमियां बताएंगे उस दिन मेरा इस नए परिवार में जुडना सार्थक हो जायेगा.

  • http://primarykamaster.blogspot.com/ प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

    सार्थक और दो टूक भी !

  • http://prashant7aug.blogspot.com प्रशांत प्रियदर्शी

    मजेदार.. बहुत बढ़िया..
    एक और विषय है जिससे ब्लोगर को बचना चाहिए.. वो है “हिंदी ब्लोगिंग” के बारे में लिखना..

    ना ना, मैं आपके इस लेख श्रृंखला की बात नहीं कर रहा हूँ.. :)

  • http://raviratlami.blogspot.com रवि

    “…हिन्दी ब्लॉग जगत अपनी शल्य-चिकित्सा खुद नहीं करेगा …”
    मुझे लगता है कि समस्या संख्या के कारण है. जब असंख्य अनगिनत हिंदी ब्लॉग हो जाएंगे तो हर विषय और रूचि के ब्लॉग मिलेंगे. फिर भी तकनीकी ब्लॉगों का घोर अकाल हिंदी में तो सदैव बना रहेगा यह भी तय है, क्योंकि हम सबको पता है, भारत में तकनीकी पढ़ाई सारी अंग्रेज़ी में होती है, और ऐसे लोगों का झुकाव जाहिर है, अंग्रेजी में लिखने का ज्यादा होगा.

  • http://kalptaru.blogspot.com विवेक रस्तोगी

    टिप्पणी का लेन देन एक सहज और स्वाभाविक प्रक्रिया है, परंतु आपकी बात बिल्कुल ठीक है इसीलिये मैं भी इस तरह की टिप्पणियों को तरजीह नहीं देता, आपकी बातें बिल्कुल सटीक हैं।

  • http://epandit.shrish.in ePandit

    टिप्पणियों के मामले में आपसे सहमत हूँ। जब मैंने पुराने जमाने में (हिन्दी ब्लॉगिंग के मामले में पाँच साल पहले के समय को पुराना जमाना ही कहेंगे) हिन्दी में पहली बार केवल तकनीक पर केन्द्रित ब्लॉग शुरु किया था तो शुरु में टिप्पणियाँ न आने से हतोत्साहित होता था। पर शीघ्र ही जब पाठकों द्वारा समय-समय पर पता चला कि मेरे लेख उनके कई बार काम आते हैं तो मैंने टिप्पणियों की परवाह करनी छोड़ दी। जैसा आपने कहा मैं अब भी टिप्पणियाँ पसन्द करता हूँ परन्तु अब उनके न आने या कम आने से विचलित नहीं होता।

  • http://twitter.com/ratansingh ratan singh

    इस श्रंखला में आपके दो लेख पढ़े आपने जो भी बातें बताई है सभी दमदार है |

  • mamta

    इक बात तो माननी पड़ेगी बॉस -लोगो को अपने विचारों और शब्दों के मध्यम से अपनी और आकर्षित करने का गुण आपमे है वरना इतने ब्लोगों को छोड़ कर आप को लोग क्यों पढ़ते हा हा हा साधुवाद -ममता

  • Kavita

    शुक्रिया ललितजी, आपके सुझाव सच-मुच विचारनीय हैं! अपने यहाँ हिंदी लेखों की बात की है… उनपर कब प्रकाश डालेंगे???

    आभार…

  • Anonymous

    shrankhala ke pichhle do parhe ab choutha parhne jaa raha hun ! abhi tak parhkar laga ham blogron ko silsilewar upyogi saamagri prastut ki hai aapne . pratikriyayon ke aane par hi aapke lekh ka aanklan ho paataa hai iseliye ye aavashyak hain .
    mere google par bloging shuru karne ke 3 maah baad bhi Bharat mai naa parha jaana aur kisee pratikriya ka naa aana nirasha ka kaaran tha kintu tabhi JAGRAN JUNCTION par blog bana wahi post wahan daali tab saarthak lekhan mai safal hun.

  • Rohit

    apki ye baat mujhe bhut achi lagi ki bina kisi chah k blog likhe aur blog soch samajh kar likhe kyu ki ye aksar hota h ham anjane me kuch aise blig likh dete h jo likhte to dosto k liye  ya majak masti me likhte h par wo kisi na kisi apne k dwra pad liya jata h. aur kai bar sarminda hona pad sakta h….. aur blogs hmesha samne wale person per effect karta h,, it may be positive or negative,, so keep blogging jo dil ko chu jae  ,aur kuch aisa kar jae,  ki sara jaha badal jae……..