
एक अच्छे ब्लॉग की ज़रूरतें - भाग 2
आपके पास आखिर कितने ब्लॉग्स होने चाहिए? शायद आपने कभी इस बारे में सोचा भी ना हो! मैनें देखा है कि बहुत से हिन्दी ब्लॉगर्स कई-कई ब्लॉग्स चलाते हैं। कई लोगो के पास तो दस से अभी अधिक ब्लॉग्स हैं। यदि आपके पास भी एक से अधिक ब्लॉग्स हैं या आप एक से अधिक ब्लॉग्स बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको यह लेख ध्यान से पढ़ना चाहिए।
ब्लॉग्स को लोग बहुत कुछ मान लेते हैं लेकिन मूलत: ये केवल सूचना-प्रसार का एक माध्यम-भर हैं। इंटरनेट पर बेहद अधिक मात्रा में सूचना उपलब्ध है और नई-नई सूचनाएँ लिख देना भी बेहद आसान हैं। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है सारी सूचना ठीक से व्यवस्थित हो। सूचना के व्यवस्थापन के लिए कोई भी निश्चित नियम नहीं हैं। व्यवस्थापन की रूपरेखा व्यक्ति, परिस्थितियों और पाठ्य सामग्री पर निर्भर करती है।
सूचना व्यवस्थापन की रूपरेखा बनाना बेहद ज़रूरी है लेकिन अमूमन लोग इस काम के लिए कुछ मिनट भी नहीं लगाते। बस मन में ख़्याल आते ही एक नया ब्लॉग बना डालते हैं। ब्लॉग बनाना इतना अधिक आसान हो चला है कि अब ब्लॉग के लिए योजना बनाने जैसी बातों की ओर कोई ध्यान ही नहीं देता।
मेरे ख़ुद के तीन ब्लॉग्स हैं (हालांकि मैं स्वयं को ब्लॉगर नहीं मानता)… तीन ब्लॉग्स मेरे विचार में बहुत ज़्यादा हैं लेकिन ये तीनों एक सोची-समझी योजना के तहत बने हुए ब्लॉग्स हैं। इनमें से हरेक को बनाने से पहले मैनें कई-कई दिन तक इनके विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है।
पर इतना सब विचार करने की ज़रूरत क्या है? आइये इन ज़रूरतों के बारे में जानते हैं:
- ऐसा हमेशा होता है कि लेखक का झुकाव अपने अनेकों ब्लॉग्स में से किसी एक की ओर अपेक्षाकृत अधिक रहता है। बहुधा यह भी होता है कि बाकि के ब्लॉग्स ध्यान ना दिए जाने के कारण पहले शिथिल और फिर धीरे-धीरे बंद हो जाते हैं
- हमें पाठकों के बारे में भी सोचना चाहिए कि उनके दृष्टिकोण से आपकी लिखी हुई चीज़ों का व्यवस्थापन कैसे किया जाए कि पाठकों को अधिकाधिक आसानी हो
- अधिक ब्लॉग्स होने की स्थिति में हमें उन्हें संभालने में भी बहुत दिक्कत होती है। अगर आप ब्लॉग्स के रख-रखाव पर ध्यान नहीं देंगे तो ब्लॉग्स फ़ालतू चीज़ो (जैसे कि विजेट्स) से भरते चले जाएंगे और वे ऐसे नहीं लगेंगे जैसे कि एक ही लेखक के हों। अपनी एक अलग पहचान स्थापित करने के लिए रख-रखाव बहुत ज़रूरी होता है
हिन्दी ब्लॉग जगत ऐसे ब्लॉग्स से भरा पड़ा है जो या तो पाँच-सात पोस्ट्स के बाद बंद हो चुके हैं या फिर उन पर लिखने वाले लेखन को गंभीरतापूर्वक नहीं लेते। ऐसा कई कारणो से हो सकता है और ज़रूरत से अधिक ब्लॉग्स का बना लिया जाना भी इनमें से एक कारण होता है।
जैसा कि मैनें कहा इसका कोई निश्चित पैमाना नहीं होता कि आपके कितने ब्लॉग्स होने चाहिये। इसलिए जो मैं कहना चाह रहा हूँ उसे अपने स्वयं के उदाहरण से कहने की कोशिश करता हूँ।
मैंने हिन्दी लेखन को करीब-करीब बंद कर दिया है क्योंकि मुझे लगता है कि मैं हिन्दी में लिख सकने में सक्षम नहीं हूँ। वैसे तो मैं अंग्रेज़ी में भी उतना अच्छा नहीं लिखता लेकिन फिर भी मैनें योजना बनाकर अपना अंग्रेज़ी ब्लॉग Writely Expressed शुरु किया। इसके कुछ समय बाद मुझे लगा कि मैं अपनी हिन्दी कविताएँ भी सार्वजनिक कर देता हूँ। इस मोड़ पर मैनें गंभीरतापूर्वक विचार किया कि हिन्दी कविताओं को अंग्रेज़ी ब्लॉग पर ही प्रकाशित करना ठीक रहेगा क्योंकि इससे मुझे एक और ब्लॉग नहीं बनाना पड़ेगा; लेकिन मैं अपने नियमित अंग्रेज़ी पाठकों को हिन्दी सामग्री भेज कर उनका समय बरबाद नहीं करना चाहता था –सो मैनें हिन्दी कविताओं का ब्लॉग अलग से बनाया। ऐसा करते हुए मैंने उसे अपने अंग्रेज़ी ब्लॉग से काफ़ी जोड़ कर रखा ताकि रख-रखाव में आसानी रहे।
यहाँ तक तो ठीक है; लेकिन कुछ मित्रों के कहने पर मैनें अपने हिन्दी लेख भी प्रकाशित करने की सोच ली। मेरी इच्छा थी कि हिन्दी लेख और हिन्दी कविताओं का ब्लॉग एक ही बने –ताकि केवल दो ब्लॉग्स से काम चल जाएँ; पर कुछ तकनीकी बातों के कारण मैनें हिन्दी लेखों के लिए एक अलग ब्लॉग बना डाला। इसी ब्लॉग पर आप यह लेख पढ़ रहे हैं। इस तरह मेरे तीन ब्लॉग्स हो गए और इनके रख-रखाव में लगने वाला समय भी बढ़ गया।
जल्दी ही मैं हिन्दी कविताओं के ब्लॉग (स्वप्न से स्मृति तक) और हिन्दी लेखों के इस ब्लॉग को एकीकृत कर दूँगा। ऐसा नहीं है मैं तीन अलग-अलग ब्लॉग्स संभाल नहीं पा रहा हूँ लेकिन जितना रख-रखाव कम करना पड़ेगा उतना ही मैं लेखन पर अधिक समय दे पाऊँगा।
मैं नहीं जानता कि मैं अपनी बात कितने स्पष्ट-रूप से कह पाया। हो सकता है मैं आपको अपनी बात नहीं समझा पाया होऊं लेकिन यह ज़रूरी है कि आप फ़ालतू ब्लॉग्स ना बनाएँ। इससे ना केवल आपको रख-रखाव में समय अधिक देना पड़ता है बल्कि आपकी लिखी हुई सामग्री व उसके पाठक भी अनेकों ब्लॉग्स में बंट जाते हैं।
एक (या कम से कम) ब्लॉग बनाइये… उस पर पूरा ध्यान दीजिए… नियमित लिखिए… अच्छा लिखिए… लेखन को गंभीरता से लीजिए… और अपनी अलग पहचान निर्मित कीजिए…
ज़रूरत से अधिक ब्लॉग्स आपकी पहचान (ब्रैंड नेम) को बनने से रोकते हैं।












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