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© लेखक: Lalit Kumar
January 11, 2011

एक अच्छे ब्लॉग की ज़रूरतें - भाग 2

आपके पास आखिर कितने ब्लॉग्स होने चाहिए? शायद आपने कभी इस बारे में सोचा भी ना हो! मैनें देखा है कि बहुत से हिन्दी ब्लॉगर्स कई-कई ब्लॉग्स चलाते हैं। कई लोगो के पास तो दस से अभी अधिक ब्लॉग्स हैं। यदि आपके पास भी एक से अधिक ब्लॉग्स हैं या आप एक से अधिक ब्लॉग्स बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको यह लेख ध्यान से पढ़ना चाहिए।

ब्लॉग्स को लोग बहुत कुछ मान लेते हैं लेकिन मूलत: ये केवल सूचना-प्रसार का एक माध्यम-भर हैं। इंटरनेट पर बेहद अधिक मात्रा में सूचना उपलब्ध है और नई-नई सूचनाएँ लिख देना भी बेहद आसान हैं। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है सारी सूचना ठीक से व्यवस्थित हो। सूचना के व्यवस्थापन के लिए कोई भी निश्चित नियम नहीं हैं। व्यवस्थापन की रूपरेखा व्यक्ति, परिस्थितियों और पाठ्य सामग्री पर निर्भर करती है।

सूचना व्यवस्थापन की रूपरेखा बनाना बेहद ज़रूरी है लेकिन अमूमन लोग इस काम के लिए कुछ मिनट भी नहीं लगाते। बस मन में ख़्याल आते ही एक नया ब्लॉग बना डालते हैं। ब्लॉग बनाना इतना अधिक आसान हो चला है कि अब ब्लॉग के लिए योजना बनाने जैसी बातों की ओर कोई ध्यान ही नहीं देता।

मेरे ख़ुद के तीन ब्लॉग्स हैं (हालांकि मैं स्वयं को ब्लॉगर नहीं मानता)… तीन ब्लॉग्स मेरे विचार में बहुत ज़्यादा हैं लेकिन ये तीनों एक सोची-समझी योजना के तहत बने हुए ब्लॉग्स हैं। इनमें से हरेक को बनाने से पहले मैनें कई-कई दिन तक इनके विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है।

पर इतना सब विचार करने की ज़रूरत क्या है? आइये इन ज़रूरतों के बारे में जानते हैं:

  • ऐसा हमेशा होता है कि लेखक का झुकाव अपने अनेकों ब्लॉग्स में से किसी एक की ओर अपेक्षाकृत अधिक रहता है। बहुधा यह भी होता है कि बाकि के ब्लॉग्स ध्यान ना दिए जाने के कारण पहले शिथिल और फिर धीरे-धीरे बंद हो जाते हैं
  • हमें पाठकों के बारे में भी सोचना चाहिए कि उनके दृष्टिकोण से आपकी लिखी हुई चीज़ों का व्यवस्थापन कैसे किया जाए कि पाठकों को अधिकाधिक आसानी हो
  • अधिक ब्लॉग्स होने की स्थिति में हमें उन्हें संभालने में भी बहुत दिक्कत होती है। अगर आप ब्लॉग्स के रख-रखाव पर ध्यान नहीं देंगे तो ब्लॉग्स फ़ालतू चीज़ो (जैसे कि विजेट्स) से भरते चले जाएंगे और वे ऐसे नहीं लगेंगे जैसे कि एक ही लेखक के हों। अपनी एक अलग पहचान स्थापित करने के लिए रख-रखाव बहुत ज़रूरी होता है

हिन्दी ब्लॉग जगत ऐसे ब्लॉग्स से भरा पड़ा है जो या तो पाँच-सात पोस्ट्स के बाद बंद हो चुके हैं या फिर उन पर लिखने वाले लेखन को गंभीरतापूर्वक नहीं लेते। ऐसा कई कारणो से हो सकता है और ज़रूरत से अधिक ब्लॉग्स का बना लिया जाना भी इनमें से एक कारण होता है।

जैसा कि मैनें कहा इसका कोई निश्चित पैमाना नहीं होता कि आपके कितने ब्लॉग्स होने चाहिये। इसलिए जो मैं कहना चाह रहा हूँ उसे अपने स्वयं के उदाहरण से कहने की कोशिश करता हूँ।

मैंने हिन्दी लेखन को करीब-करीब बंद कर दिया है क्योंकि मुझे लगता है कि मैं हिन्दी में लिख सकने में सक्षम नहीं हूँ। वैसे तो मैं अंग्रेज़ी में भी उतना अच्छा नहीं लिखता लेकिन फिर भी मैनें योजना बनाकर अपना अंग्रेज़ी ब्लॉग Writely Expressed शुरु किया। इसके कुछ समय बाद मुझे लगा कि मैं अपनी हिन्दी कविताएँ भी सार्वजनिक कर देता हूँ। इस मोड़ पर मैनें गंभीरतापूर्वक विचार किया कि हिन्दी कविताओं को अंग्रेज़ी ब्लॉग पर ही प्रकाशित करना ठीक रहेगा क्योंकि इससे मुझे एक और ब्लॉग नहीं बनाना पड़ेगा; लेकिन मैं अपने नियमित अंग्रेज़ी पाठकों को हिन्दी सामग्री भेज कर उनका समय बरबाद नहीं करना चाहता था –सो मैनें हिन्दी कविताओं का ब्लॉग अलग से बनाया। ऐसा करते हुए मैंने उसे अपने अंग्रेज़ी ब्लॉग से काफ़ी जोड़ कर रखा ताकि रख-रखाव में आसानी रहे।

यहाँ तक तो ठीक है; लेकिन कुछ मित्रों के कहने पर मैनें अपने हिन्दी लेख भी प्रकाशित करने की सोच ली। मेरी इच्छा थी कि हिन्दी लेख और हिन्दी कविताओं का ब्लॉग एक ही बने –ताकि केवल दो ब्लॉग्स से काम चल जाएँ; पर कुछ तकनीकी बातों के कारण मैनें हिन्दी लेखों के लिए एक अलग ब्लॉग बना डाला। इसी ब्लॉग पर आप यह लेख पढ़ रहे हैं। इस तरह मेरे तीन ब्लॉग्स हो गए और इनके रख-रखाव में लगने वाला समय भी बढ़ गया।

जल्दी ही मैं हिन्दी कविताओं के ब्लॉग (स्वप्न से स्मृति तक) और हिन्दी लेखों के इस ब्लॉग को एकीकृत कर दूँगा। ऐसा नहीं है मैं तीन अलग-अलग ब्लॉग्स संभाल नहीं पा रहा हूँ लेकिन जितना रख-रखाव कम करना पड़ेगा उतना ही मैं लेखन पर अधिक समय दे पाऊँगा।

मैं नहीं जानता कि मैं अपनी बात कितने स्पष्ट-रूप से कह पाया। हो सकता है मैं आपको अपनी बात नहीं समझा पाया होऊं लेकिन यह ज़रूरी है कि आप फ़ालतू ब्लॉग्स ना बनाएँ। इससे ना केवल आपको रख-रखाव में समय अधिक देना पड़ता है बल्कि आपकी लिखी हुई सामग्री व उसके पाठक भी अनेकों ब्लॉग्स में बंट जाते हैं।

एक (या कम से कम) ब्लॉग बनाइये… उस पर पूरा ध्यान दीजिए… नियमित लिखिए… अच्छा लिखिए… लेखन को गंभीरता से लीजिए… और अपनी अलग पहचान निर्मित कीजिए…

ज़रूरत से अधिक ब्लॉग्स आपकी पहचान (ब्रैंड नेम) को बनने से रोकते हैं।

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Tuesday, January 11, 2011 को पोस्ट किया |
  • Kavita

    धन्यवाद् ललितजी, आपकी जानकारी बेहद लाभदायक है! यदि आप ब्लोग्स को एककिकृत करने और उनसे जुडी अन्य बातों के बारे मैं रौशनी डाले तो मेरी काफी दुविधायं कम हो सकेगी, जैसे पृथक पृथक विषयों को कैसे सम्मिलित किया जाए???

  • http://www.merasamast.com alka sarwatmishra

    bahut achchhi baat kahi aapne
    mujhe to samajh me aa gayi
    baki ka bhagwaan maalik hai

    roman skript me likhne ke liye maafi chahungi

  • surendra parihar

    very very good, prathana karta hu aapki kalam kabhi na ruke,amrit roopi masi boond ka raspaan har pathak kare,bhotiki dunia me dam tod rahe anginat kalam beero jaag utho LALIT SAHAB laye he lalitya ka bhandaaar,

  • http://primarykamaster.blogspot.com/ प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

    पुनश्च एक ब्लॉगर के लिए उपयोगी बातें हैं !
    आप अपने को हिन्दी ब्लॉगर माने याँ ना माने ….जिस तरह से आप हिन्दी ब्लोग्स को तकनीक के आधार पर तौल रहें ……….यह अति प्रसन्नता का विषय है !

  • http://www.nukkadh.com/ अविनाश वाचस्‍पति

    क्‍या आपको नहीं लगता कि यह लेख आपने बहुत देर में लिखा है। इतने ब्‍लॉग हो गए हैं, जैसे संतानें हों, अब संतान कैसी भी हों, उनका गला कैसे घोंट सकता हूं।

  • Lalit Kumar

    @अविनाश जी,

    लेख तो तभी लिखा जाता है जब उसकी ज़रूरत होती है। आप अपने ब्लॉग्स को संतानों की तरह मानते हैं यह इस बात की ओर इशारा करता है कि इनमें से किसी भी ब्लॉग को आप शिथिल नहीं करेंगे। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आप जितने चाहे उतने ब्लॉग रख सकते हैं। मेरा लेख केवल यह कहता है कि अलग-अलग ब्लॉग बनाने की बजाए एक ही ब्लॉग रहे तो उनके management में आसानी होती है।

  • anitakumar

    Visiting this blog for the first time…interesting profile…kavita kosh ke founder….I am impressed…

  • http://raviratlami.blogspot.com रवि

    बहुत ही बढ़िया टिप्स दिए हैं आपने. हर ब्लॉगर को इसे पढ़ना ही चाहिए.

  • http://kalptaru.blogspot.com विवेक रस्तोगी

    बिल्कुल सही कहा आपने मैंने भी ४-५ ब्लॉग बना रखे हैं परंतु नियमित लेखन २ ब्लॉगों पर ही हो पा रहा है, पर अब बाकी के ब्लॉगों की सामग्री का क्या करें क्या उन्हें अपने मुख्य ब्लॉग पर ले आयें ?

  • http://epandit.shrish.in ePandit

    आपसे सहमत हूँ, मैंने भी कई बार सोचा कि अलग-अलग विषयों पर लिखने के लिये अलग-अलग ब्लॉग बनाऊँ जैसे व्याकरण सम्बंधी लेखों के लिये अलग ब्लॉग, प्रोग्रामिंग सम्बंधी अनुभव साझा करने हेतु अलग ब्लॉग, सामान्य तकनीकी लेखों के लिये अलग ब्लॉग तथा गूढ़ तकनीकी लेखों के लिये अलग ब्लॉग पर अन्ततः मैंने सभी प्रकार के हिन्दी एवं तकनीक सम्बंधी लेखों के लिये एक ही ब्लॉग रखने का फैसला किया। और आज मुझे इस फैसले पर खुशी है, मैं एक ही ब्लॉग को निरन्तर नहीं रख पाता तो इतनों को रखने से रहा था। मैंने कई लोगों को दर्जनों ब्लॉग शुरु करते देखा है कुछ समय बाद वे ब्लॉग सूने पड़ जाते हैं।

    जब तक बहुत आवश्यक न हो एक प्रकार के अल्प भिन्नता वाले विषयों को एक ही ब्लॉग पर रखना चाहिये। हाँ बहुत अलग विषय के लिये अलग ब्लॉग बनाया जा सकता है।

  • दिनेशराय द्विवेदी

    आप से पूरी तरह सहमत हूँ। एक ही ब्लाग होना चाहिए। मजबूरी में मुझे दो ब्लाग लिखने पड़ते हैं। एक पूरी तरह विधि, कानून और न्याय प्रणाली को समर्पित है।

  • Leena3malhotra

    i m following the whole series written by u. its really useful. god bless u leena malhotra http://lee-mainekaha.blogspot.com/