
एक अच्छे ब्लॉग की ज़रूरतें
Usability के आधार पर एक अच्छे ब्लॉग में जो बातें होनी चाहिएँ उनकी चर्चा मैं इस लेखमाला में करूँगा। आज बात करते हैं ले-आउट के बारे में।
ब्लॉग ले-आउट का अर्थ है ब्लॉग का डिज़ाइन। पाठक आपके ब्लॉग पर आते ही जिस चीज़ से सबसे पहले रूबरू होता है वह आपके ब्लॉग का डिज़ाइन ही है। इसलिए डिज़ाइन का अच्छा होना बेहद ज़रूरी है। यहाँ “अच्छा” होने से मेरा तात्पर्य यह नहीं है कि डिज़ाइन बेहद खूबसूरत हो। अच्छे होने का अर्थ है कि पाठक आसानी से आपकी लिखी सामग्री को पढ़ पाए। वह आखिर इसीलिए तो आपके ब्लॉग पर आया है! खूबसूरती अपनी जगह है; लेकिन ब्लॉग का प्राथमिक उद्देश्य आपके लिखे को पाठको तक पहुँचाना ही होता है। एक अच्छे ब्लॉग के लिए सबसे ज़रूरी ज़्यादा ज़रूरी है अच्छी और अर्थपूर्ण पाठ्य सामग्री का लिखा जाना –इससे अधिक कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। यदि आप अच्छा, अर्थपूर्ण और नियमित लिखते हैं तो एक खराब ले-आउट वाला ब्लॉग भी चल निकलेगा लेकिन यह ज़रूरी तो नहीं ना कि ले-आउट खराब ही रखा जाए। इसलिए आइये, मैं आपको ले-आउट से संबंधित कुछ ज़रूरी बाते बताता हूँ।
सबसे पहले रंगो की बात करते हैं। ब्लॉग के लिए सही रंगो का चयन निहायत ही महत्वपूर्ण है।
- ब्लॉग पर लिखी सामग्री आसानी से पाठ्य होनी चाहिए। मैनें ऐसे कई ब्लॉग्स देखे हैं जिनमें शब्दों और पृष्ठ के रंग कुछ इस तरह के होते हैं कि शब्द पढ़ने में ही नहीं आते।
- रंगों का सबसे अच्छा जोड़ा सफ़ेद पृष्ठ पर काले अक्षरों का होता है। सफ़ेद पर नीला अच्छा है -और काले पर सफ़ेद भी लगभग ठीक-ठाक ही है।
- कुछ बुरे उदाहरण ये हैं: सफ़ेद पर पीला, गुलाबी या हरा… काले पर पीला गुलाबी या हरा।
- यह याद रखिए कि काले, पीले और गुलाबी रंगो का ठीक से इस्तेमाल किया जाना चाहिए क्योंकि यह रंग अश्लील वेबसाइट्स पर बहुतायत से प्रयोग होते हैं। इन रंगों का ज़रूरत से अधिक प्रयोग ठीक नहीं होता।
कुल मिलाकर बात ये कि हल्के रंग के पृष्ठ पर गहरे रंग के अक्षर सबसे अधिक आसानी से पढ़े जा सकते हैं। रंगों के गहरेपन के बीच जितना अधिक अंतर होगा उतना ही अच्छा रहेगा। इसीलिए सफ़ेद पर काला सबसे अच्छा चयन होता है।
इसके बाद ब्लॉग की खूबसूरती बढ़ाने के लिए प्रयोग किए गए चित्रों की बारी आती है। चित्र जितने कम होंगे उतना अच्छा होगा। बहुत बड़े आकार के चित्र प्रयोग ना करें। बहुत से लोग; ख़ासतौर पर blogspot पर ब्लॉग बनाने वाले लोग; ब्लॉग के हैडर में बहुत बड़ी तस्वीर डाल देते हैं –जिससे होता ये है कि पाठ्य सामग्री नीचे की ओर खिसक जाती है और कभी-कभी स्क्रीन से बाहर भी निकल जाती है।
एक स्वर्णिम नियम को याद रखिए: पाठक आपका लिखा पढ़ने आता है –उसे ब्लॉग के खुलते ही पाठ्य सामग्री दिखनी चाहिए। फ़ालतू के चित्र ना केवल ब्लॉग की लोडिंग को धीमा कर देते हैं बल्कि कई बार ये चित्र पाठक का ध्यान पाठ्य सामग्री से भटका भी देते हैं।
हिलने-डुलने वाले चित्र (animated graphics) ना ही हों तो बेहतर होता है। यदि किसी कारण से आप उन्हें प्रयोग करना ही चाहते हैं तो ऐसे चित्र कम-से-कम प्रयोग करें और उन्हें ब्लॉग पर ऐसी जगह रखें जहाँ वे पाठक का ध्यान पाठ्य सामग्री से ना भटकाएँ।
ब्लॉग पर विजेट्स भी बहुत सोच-समझकर लगाएँ। फ़ालतू के विजेट्स लोड-स्पीड को बहुत कम कर देते हैं। केवल उन्हीं विजेट्स का प्रयोग करें जिससे आपको या आपके पाठकों को वाकई में कोई सुविधा मिलती हो। आइये कुछ विजेट्स के बारे में बात करते हैं।
मेरे ख़्याल से सबसे बेकार की विजेट्स में “घड़ियों” का स्थान सबसे ऊपर है। इन घड़ियों को लगाने से ना आपको कोई फ़ायदा मिलता है और ना ही पाठक को –हाँ लोड स्पीड ज़रूर घट जाती है और आपके पेज पर स्थान बेकार में घिर जाता है। आप समय देखने के लिए अपने ब्लॉग पर तो नहीं आते ना? अपनी कलाई पर बंधी घड़ी पर ही नज़र डालते हैं। कुछ लोग कहेंगे कि विदेश में रहने वाले भारतीयों को भारत का समय बताने में ब्लॉग घड़ी काम आती है; पर यकीन मानिए विदेशों में रहने वाले भारतियों को भारत का समय वैसे ही पूरी तरह से याद होता है।
अच्छी विजेट्स में हर ऐसी विजेट शामिल है जिससे आपको या आपके पाठक को कोई काम की सूचना मिलती हो लेकिन इनमें से भी केवल उन विजेट्स को ही अपने ब्लॉग पर लगाइये जो सबसे अधिक ज़रूरी हैं। विजेट्स की संख्या जितने कम हो उतना ही अच्छा रहता है। आजकल जो विजेट्स उपलब्ध हैं उनमें से निम्नलिखित मेरे विचार में काफ़ी उपयोगी हैं:
- आर्काइव
- नेटवर्क्ड ब्लॉग्स
- फ़ॉलोवर्स
- सब्सक्रिपशन के विकल्प देने वाली विजेट
ये चार विजेट्स सबसे अच्छी हैं। इनके अलावा, अपनी ज़रूरत के मुताबिक आप इन विजेट्स को भी लगा सकते हैं:
- चिठ्ठाजगत
- ब्लॉगवानी
- कविता कोश
- लालित्य
- हमारी वाणी
- गूगल एडसेंस (ठीक साइज़ और जगह पर होना चाहिए)
- अभिव्यक्ति
- गूगल एनालिटिक्स
- ब्लॉग रोल्स
विजेट्स की पहली सूची आपके पाठकों के काम की है और दूसरी सूची आपके काम की है। इससे अधिक आप जो भी विजेट लगाएँ उन्हें सोच समझकर लगाएँ। जिन विजेट्स का मैनें यहाँ नाम नहीं लिया है –ऐसा मत सोचिए कि मैं उनके प्रयोग के विरुद्ध हूँ। यह लेख मेरी व्यक्तिगत सोच-समझ पर आधारित है। बहुत-से लोगों ने मुझे अपने ब्लॉग या अन्य वेबसाइट्स का usability analysis करने को कहा है और मैनें किया भी है। Web Usability हमेशा से ही मेरा प्रिय विषय रहा है और काफ़ी अध्ययन से मैनें इस क्षेत्र में अच्छी-ख़ासी विशेषज्ञता अर्जित कर ली है। मैनें यह लेख इसलिए लिखा है क्योंकि सामान्यत: मैनें अंग्रेज़ी ब्लॉग्स की usability हिन्दी ब्लॉग्स से कहीं बेहतर पाई है। हिन्दी के ब्लॉग्स अक्सर फ़ालतू चीज़ों से भरे मिलते हैं। यह ज़रूरी है कि हिन्दी के ब्लॉगर्स usability की ओर भी ध्यान देना आरम्भ करें।
घड़ियो के अलावा कुछ और फ़ालतू विजेट्स के उदाहरण देखिये
- कर्सर का पीछा करने वाली तस्वीर
- आगंतुकों का भौगोलिक मानचित्र
- ब्लॉग पर उड़ती हुई तितलियाँ या गिरती हुई बर्फ़
- बिना किसी विशेष आवश्यकता के स्लाइड-शो
- ई-स्निप्स की विजेट्स
- कितने पाठक ऑनलाइन हैं या कितने आज आए
- दुनिया भर के हिट-काउंटर्स
- गूगल ट्रांसलिट्रेट (पेज लोड पर यह अक्सर कर्सर के फ़ोकस को पकड़ लेता है और पाठक को वापस स्क्रोल करके पाठ्य सामग्री तक पहुँचना पड़ता है)
आगे कि बातें मैं अगले लेखों में करूँगा।
यदि आप इस लेख के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देना चाहें या कोई प्रश्न पूछना चाहें तो मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं (india DOT lalit AT gmail DOT com )
–ललित कुमार












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